SUPREME COURT OF INDIA
HON’BLE R. BANUMATHI AND INDIRA BANERJEE, JJ.
Sicagen India Ltd. -Appellant
Versus
Mahindra Vadineni & Ors. -Respondent
Criminal Appeal Nos. 26-27 OF 2019
(@SLP (Crl.) Nos. 6789-6790 OF 2015)
Decided on 8-1-2019
व्यवसायिक क्रिया कलापों के अर्न्तगत देयराशि भुगतान स्वरूप विपक्षी ने भिन्न-भिन्न राशियों के प्रश्नगत चैक अपीलकर्ता को सौंपे थे।
जिन्हें भुगतान के लिये बैंक में प्रस्तुत करने पर ” अपर्याप्त धनराशि ” टिप्पणी के साथ वापिस लौटा दिया गया।
परिणाम स्वरूप अपीलकर्ता ने वैधानिक नोटिस विपक्षी को भेजा था।
जिसे प्राप्त करने के बाद विपक्षी ने चैकों को पुनः प्रस्तुत करने के लिये अनुरोध किया किन्तु पुनः चैक प्रस्तुत करने पर फिर उसी टिप्पणी के साथ चैक वापिस कर दिये गये तथा पुनः नोटिस विपक्षी को भेजा गया ।
तथा नियत समय में चैक राशि का भुगतान ना होने की स्थिति में परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अर्न्तगत एक परिवाद, विपक्षी के विरूद्ध प्रस्तुत किया गया।
जिसकी खबर लगते ही विपक्षी ने परिवाद पोषणीय ना होने के कारण निरस्त करने की मांग उच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की ।
जिसे स्वीकारते हुये माननीय उच्च न्यायालय ने अपीलकर्ता का वाद निरस्त कर दिया था।
जिसके विरूद्ध प्रश्नगत अपील प्रस्तुत की गयी थी।
दोनों पक्षों को सुना गया तथा पत्रावली का अवलोकन किया गया।
यह स्थापित नियम है कि परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के अर्न्तगत परिवाद दूसरे या क्रमिक वैधानिक नोटिस के आधार पर भी पोषणीय होता है,
अतः उच्च न्यायालय द्वारा अपनाया गया दृष्टिकोण स्पष्टतया विधि विरूद्ध है तथा निश्चित रूप से अपास्त होने योग्य है ।
तद्नुसार आदेश पारित निम्न न्यायालय को वाद की अग्रिम कार्यवाही नियमानुसार चलाने के माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा निर्देश निर्गत । अपील स्वीकृत स्वीकार की गयी |

